SAR SUWE RAUZA JHUKA(HINDI) BY SARKAR ALA HAZRAT IMAM AHMAD RAZA (RADIALLAH ANHO)
*इश्क़* *सर सूए रोज़ा झुका फिर तुझको क्या?* *दिल था साजिद नज्दीया फिर तुझको क्या?* उनके नाम ए पाक पर दिल जान व माल नज्दीया सब ताज दिया फिर तुझको क्या? *या इबादी कह के हमको शाह ने* *अपना बन्दा कर लिया फिर तुझको क्या?* देव के बंदों से कब है यह खिताब! तू न उनका था न है फिर तुझको क्या? *नज्दी मरता है के क्यों ताज़ीम की* *यह हमारा दीन था फिर तुझको क्या?* देव तुझसे खुश है हम क्या करें! हम से राज़ी है खुदा फिर तुझको क्या? *देव के बंदों से हमको क्या गरज़ !* *हम हैं अब्दे मुस्तफा फिर तुझको क्या?* तेरी दोज़ख से तो कुछ छीना नही खुल्द में पहोंचा _रज़ा_ फिर तुझको क्या? -इमाम ए इश्क़ व मुहब्ब्त, आलाहज़रत इमाम अहमद रज़ा (अलैहि रहमा)